संलग्न हूं ,
अपने दैनंदिन में ,
बरसों से बनी हुई
आदतों को सहेजने में ,
समय-समय पर सहेजे गए
क्रियाकलापों को पूरा करने में,
संलग्न हूं ।
अनवरत ,
अबाध,
मुस्कुराहटों को सामने खड़ा करने में,
संलग्न हूं
कभी इसकी कभी उसकी,
खुशियों को मूर्त रूप देने में ।
संलग्न हूं ,
अनवरत,
अबाध ,
स्वकर्म से,
खुशियों को
साकार बनाने के लिए ,
अपने आप को भुला कर ,
जैसे पता ही नहीं है कि ,
मैं खुद हूं ,
या ,
मैं कोई और।
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