परमारवंश
और राजाभोज
भारतवर्ष
अनेक क्षत्रिय राजाओं के इतिहास से अलङ्कृत है। इन सभी राजाओं के मध्य परमारवंशीय
क्षत्रिय राजा अपना विशेष स्थान रखते हैं। उदयपुर प्रशस्ति के अनुसार इस वंश के
प्रमुख या प्रथमपुरुष अर्बुदाचल पर वशिष्ठ के अग्निकुण्ड से उत्पन्न हुए थे। इन
राजाओं ने मालव देश पर अपना आधिपत्य स्थापित किया। इन राजाओं मे कृष्ण नाम से
प्रसिद्ध उपेन्द्र नामक राजा ने
नवमशताब्दी मे प्रसिद्धि प्राप्त किया। इनके वंश की परम्परा इन्हीं राजा के साथ
हमारे सामने प्राप्त होती है।
मालवाधीशों की वंशपरम्परा
1. उपेन्द्र (800-825)
2. वैरीसिंह (825-50)
3. सीयक (850-875)
4. वाक्पति (875-914)
5. वैरीसिंह (वज्रट नाम से
प्रसिद्ध) (914-941)
6. सीयक (हर्षदेव नाम से
प्रसिद्ध) (941-976)
7. वाक्पति (मुञ्ज नाम से
प्रसिद्ध) (976-997)
8. सिन्धुराज (997-1010)
9. भोजराज (1010-1055)
इस
वंशपरम्परा में विद्वानों की एक प्रसिद्ध परम्परा है। भोजराज के चाचा राजा मुञ्ज
सरस्वती के अद्भुत उपासक थे। इनके बारे मे
प्रबन्धचिन्तामणि मे एक श्लोक आया है जिसमे कहा गया है कि मुञ्ज के स्वर्गवासी हो जाने
से सरस्वती निरालम्बा हो गयी। गते
मुञ्जे यशःपुञ्जे निरालम्बा सरस्वती।
भोजराज
अपने समय मे एक जाज्वल्यमान नक्षत्र के समान थे। आप बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न,
गुणसम्पन्न लोगों के आदर करने वाले और विद्वद्जनों के द्वारा सम्मानित रहते थे। इन्होंने
कई युद्ध भी लडा था। इनके द्वारा लडे गये युद्ध मे चालुक्यराज जयसिंह के साथ
युद्ध, चेदिराज गङ्गदेव के साथ युद्ध, आदिनगर राज इन्द्नदेव के साथ युद्ध और
लाटराज वत्सराज के साथ लडे गये युद्ध प्रसिद्ध हैं। धारा और उज्जयिनी मे इन्होने
एक सौ चार भवनों का निर्माण कराया था। पन्द्रहवीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि
बल्लालसेन ने अपने भोजप्रबन्ध में राजा भोज के दान की महिमा के अद्भुत वर्णन किया
है। उन्होने लिखा है कि राजा भोज के दरबार मे जब कोई कवि सुन्दर और प्रशंसनीय
काव्य सुनाता था तो राजा उसे लक्ष स्वर्णमुद्रा प्रदान करते थे।
प्रबन्धचिन्तामणि के अनुसार राजाभोज ने एक सौ चार प्रबन्ध, इतने
हीं भवन और इतने हीं विरूद का निर्माण किया था। डॉ. टी. आफ्रैक्ट पण्डित के द्वारा
निर्मित पुस्तकसूचीग्रन्थ (Cataloge Catalogoram) मे
राजाभोज के द्वारा विरचित बाईस पुस्तकों का वर्णन किया है। डॉ. भगवती लाल राज
पुरोहित ने राजाभोज का रचना विश्व नामक अपनी पुस्तक में राजाभोज के लिखे गए साठ
पुस्तकों का वर्णन किया है। चन्द्रप्रभसूरी के द्वारा विरचित प्रभावकचरित में भोज
के द्वारा लिखे गए पचहत्तर से अस्सी पुस्तकों का वर्णन है। उनके द्वारा लिखे गए
पुस्तकों की सूची प्रकाशित और अप्रकाशित दोनो के वर्णन इस प्रकार हैं-
1.
साहित्शास्त्र
1.
सरस्वतीकणठाभरण (प्र.)
2.
शृङ्गारप्रकाश(प्र.)
2.
काव्य
3. चम्पूरामायण (प्र.)
4.
शृङ्गारमञ्जरी (प्र.)
5.
अवनिकूर्मशतक (प्र.)
6.
विद्याविनोद (प्र.)
7.
सुभाषितप्रबन्ध (प्र.)
8.
शालिकथा (अप्रकाशित)
9.
महाकालीविजय (अप्रकाशित)
10.
वाग्देवीस्तुति (प्र.)
3. व्याकरण
11.
सरस्वतीकण्ठाभरण (प्र.)
12.
प्राकृतव्याकरण (प्र.)
4. कोष
13.
नाममालिका भोजनिघण्टु (प्र.)
14.
अनेकार्थकोष
15.
अमरव्याख्या
5. संगीत
16.
गीतप्रकाश (अप्रकाशित)
6. इतिहास
17.
सञ्जीवनी (प्र.)
7. दर्शनशास्त्र
18.
तत्तवप्रकाश (प्र.)
19.
सिद्धान्तसङ्ग्रह (अप्रकाशित)
20.
सिद्धान्तसारपद्धति (अप्रकाशित)
21.
राजार्तण्डयोगसूत्रवृत्ति (प्र.)
22.
राजमार्तण्ड (वेदान्त) (अप्रकाशित)
23.
शिवतत्वरत्नकलिका (अप्रकाशित)
24.
तत्त्वचन्द्रिका (अप्रकाशित)
25.
क्रमकमलम् (अनुपलब्ध)
8. ज्योतिष
26.
राजमार्तण्ड (प्रकाशित)
27.
राजमृगाङ्क (प्रकाशित)
28.
विद्वज्जनवल्लभप्रश्नज्ञान (प्रकाशित)
29.
प्रश्नकेरली (अप्रकाशित)
30.
आदित्यप्रतापसिद्धान्त (अनुपलब्ध)
31.
भुजगबलनिबन्ध (अप्रकाशित)
32.
ज्योतिः सागरः (अप्रकाशित)
33.
रत्नकोष (अनुपलब्ध)
34.
ग्रहभाष्यम् (अप्रकाशित)
35.
भोजसामुद्रिकम् (अनुपलब्ध)
36.
रमलामृतम् (अनुपलब्ध)
9. धर्मशास्त्र
37.
पूर्तमार्तण्ड (अनुपलब्ध)
38.
व्यवहारसमुच्चय (अनुलब्ध)
39.
सिद्धान्तसारपद्धति (अनु.)
40.
व्यवहारमञ्जरी (अनु.)
41.
विविधविद्याविचारचतुरा (अनु.)
42.
राजमार्तण्ड (अनु.)
43.
बृहद्राजमार्तण्ड (अनु.)
44.
रत्नमाला/रत्नरत्नावली (अनु.)
45.
कामधेनु (अनुपलब्ध)
46.
धर्मप्रदीप (अनु.)
47.
दुगोत्सवाधिकार (अनु.)
48.
प्रयोगपद्धतिरत्नावली (अनु.)
49.
मनुस्मृतिभाष्यम् (अनु.)
50.
धारेश्वरमिताक्षरा (अनु.)
10.
राजनीतिशास्त्र
51.
नीतिनिबन्धनम् (अनु.)
52.
चाणक्यराजनीतिशास्त्रम् (प्र.)
53.
युक्तिकल्पतरु (प्र.)
11.
आयुर्वेद
54.
चारुचर्या (प्र.)
55.
राजमृगाङ्क (अप्रकाशित)
56.
विश्रान्तविद्याविनोद (अप्रकाशित)
57.
आयुर्वेदसर्वस्वम् (अनु.)
58.
राजमार्तण्डयोगसारसङ्ग्रह (प्र.)
59.
शालिहोत्रम् (प्र.)
12.
स्थापत्य
60.
समराङ्गणसूत्रधार (प्र.)
61.
वास्तुशास्त्रम् (अप्रकाशित)
13.
सन्देहास्पद कृतियां
62.
अनिभवभाष्यम्
63.
पञ्चाशिका
64.
मेघमाला
65.
अयसदावविवृतिः
66.
वृत्तिमर्तण्ड
67.
सिद्धान्तसङ्ग्रहविवृतिः
68.
द्रव्यानुयोगतर्कणा
69.
न्यायवार्तिकम्
70.
खड्गशतकम् (प्र.)
71.
अज्ञातनामा प्राकृतकाव्यम् (प्र.)
72.
मीमांसा