बसंत
सुनते हीं,
पुलक गात,
बिगड़ते जज्बात,
मन में उन्माद
अपनी जगह बना लेते हैं।
बसंत,
सुनते ही,
मन में सुमन,
बाग मे गुन्जन,
सुन्दरी का वदन,
दृष्टिगत होने लगता है।
बसंत,
सुनते हीं,
रसाल में बौर,
अली का शोर,
पवन मे जोर,
नजर आने लगता है।
बसंत
सुनते हीं,
पेय मे भंग,
गालों मे रँग,
मन में उमंग,
घहराने लगता है।
#वदन=मुख


No comments:
Post a Comment