पिता
ढाल है,
दीवार है,
पतवार है।
पिता
आशावादी है,
चिन्तक है,
ज्योतिषी है।
पिता
खुशी बांटता है,
दुःख रोकता है,
आनन्ददाता है।
पिता
धूप ओढता है,
बरसात में नहाता है,
बेचैनी में सोता है।
पिता
खुश होता है,
सुतानन लख कर,
जिद पूरी कर,
खुद का मनमसोस कर।
पिता
ब्रह्मा है,
कुम्हार है,
मूर्तिकार है।
पिता की बात मान लेने वाला,
आत्मज,
सुख पाता है,
यश फैलाता है,
प्रशंसा बटोरता है।
पिता
हित चाहता है,
हित करता है।
पिता
न पुराना होता है,
न पुरानी सोच का होता है।
यह हमारी सोच का हिस्सा है,
हम क्या मानते हैं।
पिता तो बस,
पिता होता है।

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