सैनिक
सैनिक,
अभिधान प्रथित है।
राष्ट्र रक्षण तत्पर मै,
शीत ताप में भेद न जानूं,
प्रेम हृदय में धारूं मैं।
शत्रु शमन,
मानवता रक्षण,
और परिजन पोषण जानूं मै।
वेश अलौकिक तनिक न मेरी,
फिर भी भय में रहते सब,
पुत्र अंक में लोटे मेरे,
निश्छल हूं यह जानूं मै।
सैनिक,
यह अभिधान प्रथित है।
Bahut khoob ......
ReplyDeleteLage rahiye...
Ji awashya
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