2/28/2019
2/26/2019
2/25/2019
कलम
कलम
संस्कृत के एक कोश के अनुसार "वह प्रसिद्ध वस्तु जिससे लिपि का विन्यास किया जाये" कलम कही जाती है। यह कलम सबके लिये अत्यंत मूल्यवान, आवश्यक और अनिवार्य वस्तु है। मुझे ऐसा अनुभव होता है कि इससे अक्सर भाग्य लिखा जाता है। जब कभी कोई असफल महसूस करता है तो कहता है भगवान ने मेरे भाग्य मे लिखा ही नहीं है। यहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो कहते है मैने कितनों भाग्य लिखा है, और कुछ तो यहां तक कहते हैं मैने अपना भाग्य स्वयं लिखा है।
इस कलम की महिमा तो देखिये इससे स्लेट पर, दीवाल पर, होर्डिग पर लिखने का मतलब है जब मन किया मिटा दो। पर भाग्य में लिखा नहीं मिटा सकते।
कुछ लोग तो ऐसा लिखते हैं की उनको 'कलम का जादूगर' या 'कलम का सिपाही' कहा जाता है। उनकी लिखावट को लोग धरोहर मानते हैं। अच्छा मजे की बात तो देखिये की लिपि के ज्ञान के बावजूद लिखने के लिये उपयुक्त कुछ ही लोग माने जाते है। कानून की बातें वकील, समाचार को पत्रकार, आवेदन को अभ्यर्थी, कथा कहानी कविता को रचनाकार, गीत को गीतकार, पाठ्यपुस्तक को शिक्षाविद् लिखते हैं। वैसे यह सूची कुछ लम्बी है इस लिये विस्तार न करते हुये विषय पर आते हैं।
कुछ लोगों के कलम मे बड़ी ताकत होती है वे प्रसन्न होकर जिसका नाम लिख दें उसी की नौकरी पक्की और यदि रुष्ट हो जायें तो नैकरी समाप्त। इस कलम से आशिक जब हृदय रुपी उदधि मे उठती हुयी लहरों की बात लिखता है तो प्रेमी तो क्या अपरिचित मानव भी उसको अपनी ही बात मनाने लग जाता है। स्नेह सागर का पानीय निर्बंध हो आंखों से बाहर आ जाता है। कलम से जब कालिदास "अज का क्रन्दन" लिखते हैं तो हिन्दी का कवि पूछ बैठता है " कालिदास सच सच बतलाना आज रोया या तुम रोये थे"।
साथियों यह कलम सच मे अद्भुत है । लिखना शुरु करें तो रुकने का नाम नहीं लेती है।
2/23/2019
रास्ता
रास्ता
निरपेक्ष भाव से सबका स्वागत है यहां ।जाने के लिए आओ, ठहरने के लिए आओ, देखने को आओ, नापने के लिए आओ, पाने के लिये आओ या खोने के लिए आप सब का स्वागत है । पाने के लिये बच्चन साहब कहते हैं "राह पकड़ तू एक चला चल पा जायेगा मधुशाला "। अर्थात् मेरा अनुकरण करो और प्राप्तव्य हाजिर है कदमों मे। यह मत सोचो चलना कहाँ से है । तू जहाँ है वहीं से चलना प्रारम्भ करो तो सही।
यदि खोना चाहते हो तो भी मेरा अनुकरण करो।आओ और मेरे मे उलझ जाओ। किंकर्तव्य विमूढ हो जाओ। निर्णय विहीन हो जाओगे, समझ ही नही पाओगे सही यही है या कोई और। जिससे पूछोगे वह भी तुम्हारी ही तरह उलझा मिलेगा। पर वह तुमसे पहले से उलझा मिलेगा। दुसरा तीसरा सब उलझे मिलेंगें।
देखने के लिये आओगे तो कभी नीरवता पाओगे कभी कोलाहल, कभी उत्सव पाओगे कभी शोक ही नसीब होगा। पर खूबसूरती मे खो जाओगे कभी उदास हो जाओगे।
ठहरना चाहोगे तो साम्राज्य के अधिपति भी हो सकते हो या रंक के रिस्तेदार।
जी हाँ श्रीमान् मैं रास्ता हूँ । मै स्वभाव से भी रास्ता हीं हूं। संस्कृत मे मुझे परिभाषित करते हुये आचार्य कहते हैं "महाजनो येन गत: स पन्था:"। अर्थात् महान लोग जो आचरण करते हैं उसे हीं पथ कहा गया है। पर हिन्दी के कवि कहते हैं "लीक छोड़ तीनो चले शायर सिंह सपूत"।
श्रीमान् जी निर्णय आपका है आप मुझे क्या मानते हैं? पर मैं हूँ तो रास्ता हीं।
पिता
पिता
ढाल है,
दीवार है,
पतवार है।
पिता
आशावादी है,
चिन्तक है,
ज्योतिषी है।
पिता
खुशी बांटता है,
दुःख रोकता है,
आनन्ददाता है।
पिता
धूप ओढता है,
बरसात में नहाता है,
बेचैनी में सोता है।
पिता
खुश होता है,
सुतानन लख कर,
जिद पूरी कर,
खुद का मनमसोस कर।
पिता
ब्रह्मा है,
कुम्हार है,
मूर्तिकार है।
पिता की बात मान लेने वाला,
आत्मज,
सुख पाता है,
यश फैलाता है,
प्रशंसा बटोरता है।
पिता
हित चाहता है,
हित करता है।
पिता
न पुराना होता है,
न पुरानी सोच का होता है।
यह हमारी सोच का हिस्सा है,
हम क्या मानते हैं।
पिता तो बस,
पिता होता है।
Subscribe to:
Comments (Atom)
शिक्षक
💐सबको शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।💐 शिक्षक एक ऐसा अभिधान है जो हम सभी के जीवन में अपना अमूल्य स्थान रखता है। वैसे तो हम रोज कुछ ना क...
-
बसंत बसंत, सुनते हीं, पुलक गात, बिगड़ते जज्बात, मन में उन्माद अपनी जगह बना लेते हैं। बसंत, सुनते ही, मन में सुमन, बाग ...
-
परमारवंश और राजाभोज भारतवर्ष अनेक क्षत्रिय राजाओं के इतिहास से अलङ्कृत है। इन सभी राजाओं के मध्य परमारवंशीय क्षत्रिय राजा अपना विशेष स्थ...
-
💐सबको शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।💐 शिक्षक एक ऐसा अभिधान है जो हम सभी के जीवन में अपना अमूल्य स्थान रखता है। वैसे तो हम रोज कुछ ना क...





