सेल्फी वाले ने
बहुत
रुलाया
भाग्य
नहीं है छोटा
ना हीं
मै हूं खोटा
मेहनत
का खाता हूं ।
धन
सञ्चय का लोभ नहीं है
कर्मों
का कोई दोष नही है
भुजबल
है अनन्त अपार
मेहनत
है मेरा व्यापार।
साथ
बिताये हैं मैने
भवन
बनाये है मैने
कभी
लकडियों के गठ्ठर से
आसन
सजाये हैं मैने ।
अन्न
बांध कर पहुंचाया
हरा
साग भी खूब खिलाया
चेहरे
पर मुस्कान कि खातिर
मस्तक
भी है खूब नवाया ।
कहो
क्या रही कमी हमारी
खिदमत
मे जो प्यारी प्यारी
दुर्दिन
के साथी बनने मे
केवल
चित्र लगे तुमको प्यारी ।
उपहास
उडाये जाते
चित्र
फैलाये जाते हो
देते
हो एक समय का
कहते
ऐसे, जैसे ,
पालक
हो जीवन भर का ।
उम्मीद
विहीन नहीं हूं मै
उत्साह
भरा है अन्तस् मे,
आश्रित हमे तुम मान रहे हो
अपने पर इतरा रहे हो ।
पर हम बिन तुम अधूरे हो
हम से ही तो पूरे हो ।
कार्य साधक और सुविधा कर्ता
जो चाहो सब हम से होता ।

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